फहमी बदाउनी उर्दू शायरी का एक मोतबर नाम ...एक खूबसूरत ग़ज़ल आप अहबाब की नज़र
हमको रस्ता बता के लौट गए
हमसफ़र मुस्कुरा के लौट गए
रात भर आंधियां चली घर में
तुम तो पर्दा हिला के लौट गए
वो जो कहते थे घर बनायेंगे
सिर्फ नक्शा बना के लौट गए
जाने अन्दर से क्या खबर आई
अश्क आँखों में आ के लौट गए
नब्ज़ पर उँगलियाँ नहीं रखीं
सब दवाएं बता के लौट गए
शहर-ऐ-दिल में कमाने आये थे
सूरमा लुट-लुटा के लौट गए .........
फ़हमी बदाउनी
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